26 नवंबर 2014 - 18:15
 मस्जिदुल अक़सा के नीचे शहर बनाने का षडयंत्र

ज़ायोनी शासन मस्जिदुल अक़सा के नीचे अवैध रूप से एक भूमिगत नगर बनाना चाह रहा है।

ज़ायोनी शासन मस्जिदुल अक़सा के नीचे अवैध रूप से एक भूमिगत नगर बनाना चाह रहा है।
ज़ायोनी शासन की ओर से सदैव ही यह दावा किया जाता रहा है कि मस्जिदुल अक़सा की भूमिगत खुदाई केवल धार्मिक दृष्टि से की जा रही है किंतु प्रमाणों से सिद्ध होता है कि इस अवैध शासन का यह अवैध कार्य, बैतुल मुक़द्दस मे रहने वाले फ़िलिस्तीनियों को लक्ष्य बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।  फ़ार्स समाचार एजेन्सी के अनुसार ज़ायोनी शासन की ओर से सदैव ही यह बात कही जाती रही है कि मस्जिदुल अक़सा के नीचे की जाने वाली खुदाई, का उद्देश्य सुलैमान उपासना स्थल का निर्माण करना है जबकि इस तर्क में कोई सच्चाई नहीं है।
हालांकि वास्तविकता यह है कि इस खुदाई का उद्देश्य, बैतुल मुक़द्दस के फ़िलिस्तीनियों को लक्ष्य बनाना और बैतुल मुक़द्दस के अरब क्षेत्रों में जाने वाले पर्यटकों को रोकना है।  प्राप्त सूचना के अनुसार ज़ायोनी शासन, मस्जिदुल अक़सा के नीचे खुदाई का कार्य कहीं-कहीं पर सामने और कहीं पर छिपकर करता है।
मस्जिदुल अक़सा के वक़्फ़ बोर्ड ने हालिया दिनों में घोषणा की है कि ज़ायोनी शासन ने मस्जिदुल अक़सा के अन्तिम छोर पर स्थित “बाबुल मुतह्हरा” क्षेत्र में एक भूमिगत सुरंग खोदने की सूचना दी है।  इस स्रोत के अनुसार यह कार्य पिछले कई वर्षों से जारी है।
इसी संदर्भ में बैतुल मुक़द्दस के मामलों के जानकार जमील उमर ने कहा कि ज़ायोनी शासन, बैतुल मुक़द्दस के ठीक नीचे एक भूमिगत नगर बनाना चाहता है जहां पर निश्चिंत होकर रहा जा सके।  इस प्रकार से ज़ायोनी, अपने धार्मिक ग्रंथ तलमूद में वर्णित कथन के अनुसार दाऊद या डेविड नगर बसाना चाहते हैं।  उन्होंने कहा कि इस भूमिगत सुरंग का नाम बैतुल मुक़द्दस है जिसका क्षेत्रफल बहुत बड़ा है।  जमील उमर ने कहा कि “क़ुब्बतुस्सख़रा” के नीचे भी गोपनीय ढंग से खुदाई का काम चल रहा है।
मस्जिदुल अक़सा की हस्तलिखित धरोहर विभाग के प्रमुख नाजेह बुकैरात ने बताया है कि मस्जिदुल अक़सा के नीचे ज़ायोनियों द्वारा की जाने वाली खुदाई के कारण बहुत से फ़िलिस्तीनियों के घरों के धंसने का ख़तरा उत्पन्न हो गया है।  उन्होंने कहा कि यह ख़तरा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।